कल्पना नाथ मंदिर की संपूर्ण जिनकारी

कल्पना नाथ मंदिर की संपूर्ण जिनकारी

तो दोस्तों आपको हमारे भारत देश में स्थित शिव जी के पंच केदार के बारे में तो मालूम ही होगा, जहां शिव जी के अलग-अलग अंगों की पूजा की जाती है। तो अगर बात करें कल्पनानाथ मंदिर की, तो हम आपको बता दें की कल्पनानाथ मंदिर भगवान शिव के उन्ही पंचकेदारों में से एक है, जो की भगवान शिव को समर्पित है। इसे कल्पेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। अगर पंचकेदारों की बात करें, तो कल्पना नाथ मंदिर का नाम पंचकेदारों में पांचवें नंबर पर आता है, यहां भगवान शिव जी की पूजा जटा के रूप में यानी कि उलझे हुए बाल की पूजा की जाती है। कल्पना नाथ मंदिर हमारे भारत के उत्तराखंड राज्य के अंतर्गत गढ़वाल के चमोली जिले मे स्थित है, और इसकी सबसे खास बात यह है की पंच केदारो में से पांचो मंदिर में से यह एकमात्र ही ऐसा मंदिर है, जहां जाकर आप 12रो महीने शिव जी के दर्शन करके शिवजी की जटा की पूजा कर सकते हैं।

 अगर इस मंदिर की बात करें, तो यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 2200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जहां लाखों की संख्या में लोगों की भीड़ लगी होती है, तो अगर आप भी वहां जाकर शिवजी के जटाओं के दर्शन करके उनकी पूजा करना चाहते हैं, तो इस आर्टिकल को आखिरी तक जरूर पढ़ें, क्योंकि इस आर्टिकल में हम आपको कल्पना नाथ में घूमने की पूरी जानकारी देने वाले हैं, तो चलिए शुरू करते हैं।

कल्पनानाथ का इतिहास

कल्पना नाथ मंदिर इस जगह में होने के पीछे एक पौराणिक कथा है, कहा जाता है कि इसका इतिहास महाभारत काल के युद्ध से जुड़ा हुआ है, और इसका निर्माण पांडवो ने किया था। कहा जाता है कि युद्ध समाप्त होने के बाद पांडवों को बहुत ही ज्यादा आत्मग्लानि हो रही थी, कि उन्होंने अपने ही संबंधियों की हत्या की है,  जिसके बाद श्री कृष्ण जी ने उन्हें पंच केदार की यात्रा करने को कहा, ताकि वह इसका पश्चाताप कर सकें। इसके लिए पांडवों ने शिवजी से मिलकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने की सोची, जिसके लिए वे सबसे पहले वाराणसी गए, लेकिन अपने ही सगी संबंधियों की हत्या करने के कारण शिवजी पांडवों से बहुत ही ज्यादा नाराज थे, इसलिए वह पांडवों के वाराणसी आने से पहले ही गुप्तकाशी चले गए, ताकि पांडव उनके दर्शन ना कर पाए। जब पांडव गुप्तकाशी गए, तो शिवजी वहां से भी केदारनाथ चले गए, और अपने आप को एक बैल के रूप में परिवर्तन कर लिया, ताकि पांडव उनके दर्शन ना कर पाए। जब शिवजी बैल का रूप धारण किए हुए थे, तब उनके विभिन्न अंग अलग-अलग जगह में प्रकट हुए थे, जैसे कि उनके धड़ के ऊपर का भाग काठमांडू में, इसी तरह तुगन्नाथ में शिव जी की भुजा। मध्यमाहेश्वर में उनकी नाभि, उनकी पीठ केदारनाथ में और रही बात कल्पनानाथ की तो वहां शिवजी की जटा प्रकट हुई थी, इसलिए यहां इस मंदिर का निर्माण हुआ, और इसीलिए आज के समय में भी इस स्थान पर शिव जी की पूजा उनके जटा के रूप में की जाती है। कहा जाता है कि यह साक्षात शिवजी की ही जटा है।

एक और कथा के अनुसार हमें पता चलता है कि इसी स्थान पर वरदान देने वाले कल्पवृक्ष के नीचे बैठकर दुर्वासा ऋषि ने बहुत तपस्या की थी, जिसकी वजह से इस स्थान को कल्पनानाथ और कल्पेश्वर के रूप में जाना जाने लगा।

कल्पनानाथ मंदिर कैसे पहुंचे?

तो दोस्तों अगर आप भी कल्पना नाथ मंदिर जाकर शिवजी की जटा के रूप में पूजा करके शिवजी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो हम आपको बता दें कि यहां आने में आपको किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होगी, यहां आने के लिए आपके पास तीन विकल्प है, पहला सड़क मार्ग, दूसरा रेल मार्ग, और तीसरा हवाई मार्ग। इन तीनों साधनों से आप यहां आसानी से पहुंच सकते हैं, तो इन तीनों साधनों से यहां किस प्रकार से पहुंचना है, इसके बारे में जानकारी हमने आपको बताई है।

:सड़क मार्ग

तो दोस्तों अगर आप सड़क मार्ग से यात्रा करने के बारे में सोच रहे हैं, तो हम आपको बता दें कि आपको हरिद्वार जैसे शहरों से आसानी से जोशीमठ के लिए बसें मिल जाएगी, जिसकी मदद से आप कल्पेश्वर मंदिर तक जा सकते हैं। अगर रही बात कल्पेश्वर मंदिर की, तो हम आपको बता दें कि कल्पेश्वर मंदिर जोशीमठ से 28 किलोमीटर पहले उर्गम गांव में मौजूद है, जोशीमठ जाने के बाद आप टैक्सी की मदद से उर्गम गांव आकर सिर्फ एक या दो किलोमीटर गुफा में चलकर ही कल्पेश्वर मंदिर तक पहुंच सकते हैं, और आप चाहे तो हेलंग में उतरकर 14 किलोमीटर के रास्ते को पैदल पार करके भी कल्पेश्वर मंदिर तक पहुंच सकते हैं, क्योंकि हेलंग से ही कल्पेश्वर मंदिर तक 14 किलोमीटर का रास्ता जाता है, जहां लोगों के द्वारा पैदल यात्रा की जाती है।

रेल मार्ग

तो दोस्तों अगर आप ट्रेन के माध्यम से कल्पना नाथ मंदिर आना चाहते हैं, तो कल्पना नाथ मंदिर का निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश रेलवे स्टेशन है, जो कि मंदिर से मात्र 250 किलोमीटर दूर स्थित है, जहां आने के बाद आप बस या फिर टैक्सी की मदद से कल्पेश्वर मंदिर तक जा सकते हैं, लेकिन हम आपको बता दें कि ऋषिकेश रेलवे स्टेशन एक छोटा रेलवे स्टेशन है, इसलिए अगर आपको अपने शहर से यहां के लिए ट्रेन ना मिले तो आप हरिद्वार रेलवे स्टेशन के लिए भी ट्रेन पड़कर आगे का सफर बस या फिर टैक्सी से करके कल्पनानाथ मंदिर तक पहुंच सकते हैं।

 

 

हवाई मार्ग

तो दोस्तों अगर आप चाहते हैं कि आप अपने शहर से कल्पेश्वर मंदिर तक हवाई मार्ग से पहुंचे, तो हम आपको बता दें कि कल्पेश्वर मंदिर का नजदीकी एयरपोर्ट देहरादून में स्थित जॉली ग्रांट इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट होने के कारण आपको लगभग सभी प्रमुख शहरों से यहां के लिए फ्लाइट आसानी से मिल जाएगी, जिससे कि आप बहुत ही आसानी से यहां पहुंच सकते हैं, जिसके बाद आप आगे का सफर यानी कि देहरादून से कल्पेश्वर तक जाने के लिए बस या टैक्सी आदि का इस्तेमाल कर सकते हैं।

कल्पना नाथ मंदिर जाने का सबसे सही समय

तो दोस्तों चाहे आप कहीं भी जाएं, आपको वहां सही समय में ही जाना चाहिए, ताकि आपको वहां किसी भी प्रकार की परेशानी ना हो, और आप आसानी से वहां जाकर घूम सके। तो रही बात कल्पनानाथ मंदिर जाने के सही समय की, तो हम आपको बता दें की कल्पनानाथ मंदिर जाने का सबसे सही समय मई से लेकर अक्टूबर का होता है, क्योंकि इस समय वहां का मौसम आपके घूमने के लिए अनुकूल होता है, सर्दियों के मौसम में उत्तराखंड में बर्फबारी होने का बहुत ही ज्यादा खतरा होता है, जिससे कि वहां बहुत ही ज्यादा ठंड होती है, और वहां का रास्ता दुर्गम हो जाता है, जिसकी वजह से आपको अपने सफ़र में परेशानी होती है। इसलिए अगर आप सही समय में कल्पेश्वर मंदिर जाना चाहते हैं, तो आप मई से लेकर अक्टूबर के बीच में कभी भी कल्पेश्वर मंदिर जा सकते हैं, क्योंकि यहां 12रो महीने शिव जी के जटा के दर्शन होते हैं।

Conclusion

तो दोस्तों उम्मीद है कि आपको आज का हमारा यह आर्टिकल पसंद आया होगा, जहां हमने आपको कल्पनानाथ मंदिर और कल्पनानाथ मंदिर पहुंचने के बारे में पूरी जानकारी दी है। तो अगर आप भी अपने पूरी फैमिली के साथ कल्पनानाथ मंदिर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो हमारे इस आर्टिकल में बताए गए तरीके और समय के अनुसार आप बिना किसी परेशानी के कल्पना नाथ मंदिर तक पहुंचकर शिव जी के जटा के दर्शन कर सकते हैं।

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